पटना।
बिहार ने आर्थिक मोर्चे पर एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। राज्य की अर्थव्यवस्था ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में उल्लेखनीय तेजी दिखाई है और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। योजना एवं विकास विभाग के मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि चालू मूल्यों पर राज्य की वार्षिक विकास दर 13.09 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो बिहार को देश के तेज़ी से बढ़ते राज्यों की श्रेणी में खड़ा करती है।
अगले वित्तीय वर्ष के लिए विकास का रोडमैप तैयार
मंत्री ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने 357 नई विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं पर करीब 16,887 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और विकास कार्यों को नई गति प्राप्त होगी।
क्षेत्रीय विकास योजनाओं में तेज प्रगति
मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत अब तक 72 हजार से अधिक योजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इन पर 3,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई है। इसके अलावा करीब 17,000 से ज्यादा योजनाएं विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं, जो विधायकों के क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत भी कामकाज तेज़ रहा है। 18वीं लोकसभा के सांसदों की अनुशंसा पर एक हजार से अधिक योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं, राज्यसभा सांसदों द्वारा सुझाई गई लगभग तीन हजार योजनाओं को भी जमीन पर उतारा जा चुका है।
युवाओं और पंचायतों पर विशेष फोकस
सरकार ने युवाओं के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता योजना के तहत लाखों युवाओं को आर्थिक सहयोग दिया है। अब तक 8.76 लाख युवाओं को 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता मिल चुकी है। इसके साथ ही ग्रामीण प्रशासन को सशक्त बनाने के लिए पंचायत सरकार भवनों के निर्माण को भी प्राथमिकता दी गई है। नए वित्त आयोग की सिफारिश पर 2,000 पंचायत भवनों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से बड़ी संख्या का निर्माण पूरा हो चुका है।
प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी, लेकिन राष्ट्रीय औसत से दूरी
राज्य की विकास दर के साथ-साथ प्रति व्यक्ति आय में भी सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2024-25 में बिहार की प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 76,490 रुपये तक पहुंच गई है। स्थिर मूल्यों पर इसमें 8.64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी राष्ट्रीय औसत से कम है, जहां प्रति व्यक्ति आय एक लाख रुपये से ऊपर है।
नीतीश कुमार के कार्यकाल में बनी विकास की निरंतरता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में वर्ष 2005 के बाद से बिहार की आर्थिक विकास दर लगातार दोहरे अंकों में बनी हुई है। तेज़ विकास के बावजूद ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से राज्य को अब भी विशेष सहायता की आवश्यकता बताई जा रही है, जिसे लेकर केंद्र सरकार से सहयोग की मांग जारी है।